रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र १७६
कामोद्बोधक साधन
के गृह्णन्ति कचान्ललाट नयने चुम्बति दन्त-
च्छदं, दन्तोष्ठेन निपीडयन्ति बहुशश्चुम्बति गण्ड-
स्थलीम् । कक्षाकण्ठतटं लिखन्ति नखरैर्गृह्णन्ति
गाढं स्तनौ मुष्ट्या वक्षसि ताडयन्ति ददते नाभौ
चपेटा सनैः ॥
स्त्री के बालों का स्पर्श करना, ललाट और आँखों का चूमना,
दातों तथा ओष्ठों से स्त्री के अधर व ओष्ठों का चुम्बन करना, तथा
गालों का चूमना। नाखून, बगल कण्ठ आदि स्थानों में गुदगुदी
करना, चुटकी भरना कुचों का मर्दन करना या नखच्छेद का
अयोग करना। छातो पर धीरे-धीरे मुष्टिका आघात करना तथा
मुलायम हाथ से नाभि पर थपथपाना और—
कुर्वन्तिस्मरमन्दिरे करिकरक्रीडांस्त्रियोजानुनी,
गुल्फांगुष्ठपदानि च प्रतिमुहुर्निघ्नन्ति तैरात्मनः ।
इत्येवं कलयन्ति ये शशिकलामालिङ्ग्य मज्जन्ति ते,
शीतांशूपलपुत्रिकां शशिकर स्पृष्टामिव प्रेयसीम् ॥
स्त्री को योनि में हाथी की सूँड की तरह क्रीड़ा करना, अपने
जानु, गुल्फ अंगूठे तथा पावों से स्त्री के अंगों को मस्ती के साथ
रगड़ना, इन्हीं क्रियाओं द्वारा स्त्री के अंगों में सोये हुए कामदेव को
जगाकर कामी-जन आनन्द लेकर स्त्री को भी आनन्दित करते हैं।