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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 183, कुल 440 में से

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१७८ असली कोकशास्त्र
( ६ ) छठवाँ, नाक में मोती पड़ो नथिया या लौंग बुलाक
आदि पहनना ।
( ७ ) सातवाँ, सोने का गले में कण्ठाहार या सिकड़ी आदि
पहनना ।
( ८ ) आठवाँ, बाल सँवार कर चोटी बाँधना ।
( ९ ) नौवाँ, फूलों के बने हुए आभूषण अंगों में पहनना ।
( १० ) दसवाँ, माथे में सिन्दूर भरना ।
( ११ ) ग्यारहवाँ, शरीर में केसर कस्तूरी मिश्रित चन्दनादि
सुगन्धित वस्तुओं का लेप करना ।
( १२ ) बारहवाँ, कुचबन्धिका अर्थात् अँगिया ( चोली )
पहनना ।
( १३ ) तेरहवाँ, कमर में करधनी पहनना ।
( १४ ) चौदहवाँ, हाथों में कङ्कण ( कङ्कन ) या चूड़ी आदि
पहनना ।
( १५ ) पन्द्रहवाँ, अँगुलौक अर्थात् अँगूठी छल्ला आदि
आभूषणों को धारण करना ।
( १६ ) सोलहवाँ, केसर कस्तूरी मिश्रित सुगन्धित पान
खाना ।
ये उपरोक्त स्त्री के नैतिक शृंगार हैं । जो स्त्री प्रतिदिन बिला
नागा सोलहों शृङ्गार करती है। उसका पति कभी विमुख नहीं
हो सकता । स्त्री के ये ही मोहनास्त्र हैं ।