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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 179, कुल 440 में से

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१७४ असली कोकशास्त्र
पर कामबाण का काम करते हैं इस लिए उन्हें रस बाण भी कहते
हैं । नानाविध रसों का आस्वादन कर मनुष्य रस बाण के लक्ष्य
होकर काम के शिकार हो जाते हैं । इसी कारण मनु भगवान् ने
खट्टे आदि कामोत्तेजक रसों का निषेध ब्रह्मचर्य अवस्था में किया है ।
गन्ध बाण
बढ़िया सुगन्धित मालाओं के हार इत्र फुलेल व्यवहार करने
वाले स्त्री-पुरुष गन्धबाण से बिद्ध होकर काम के शिकार हो जाते
हैं । यथार्थतः कामोत्तेजना के लिए इनका व्यवहार किया भी जाता
है । इन्हीं रसबाण और गन्धबाण से बिंधा हुआ भ्रमर, काठ जैसी
कठोर वस्तु में छेद करने की सामर्थ्य वाला होकर भी, अति कोमल
पद्मपुष्प में सूर्य छिपते ही बन्द हो जाता है और भीतर बैठा गन्ध
रस का भोग करता हुआ मन-ही-मन सोचता है कि सबेरा होते ही
सूर्य उदय होगा तब फूल खिल जायगा और मैं उड़कर दूसरे फूल
पर जाऊँगा । किन्तु पुष्प की उन मुलायम पंखड़ियो को सामर्थ्य
रहते हुए भी नहीं काटता । प्रातःकाल होने के पहले ही, हाथियों
का एक झुण्ड आता है और पानी पोते समय कलोल करता हुआ
उस मृणालमय पुष्प को सूँड से उखाड़ कर खा जाता है । भ्रमर
का न वह पुष्प खिलता है और न वह दूसरे पुष्प पर जाता है ।
उसकी सम्पूर्ण आशायें मन में समाप्त हो जाती हैं । ठीक यही
अवस्था इन उपरोक्त बाणों से बिद्ध, कामदेव के शिकार कामी पुरुषों