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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 177, कुल 440 में से

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पृष्ठ 177

१७२ असली कोकशास्त्र
बिजली दौड़ जाती है। यही स्पर्श बाण का प्रहार है। इसका
विशेषोद्वेग हाथी में देखा जाता है। मदोन्मत्त हाथी जब बिगड़
जाता है, तब उसे वश में लाने के लिए हथिनी को छोड़ते हैं। उसके
स्पर्श-मात्र से शान्त होकर हाथी खड़ा हो जाता है। जंगली हाथी
को पकड़ने के लिये जंगल में एक गहरा गढ़ा खोदकर उस पर
पतली लकड़ियों की छत बना देते हैं। बाद उसके ऊपर जौ आदि
बो देते हैं। हाथी हरी-हरी जौ की खेती समझ कर खाने आता है
और उसमें गिर पड़ता है। जब भूख-प्यास से व्याकुल होकर क्रोध
से चिन्हाड़ने लगता है तब सिखायी हुई हथिनियों की सूँड़ से फँसवा
कर बाहर निकाला जाता है। भूखा-प्यासा और क्रुद्ध होने पर भी
हथिनियों के स्पर्श से वह शान्त हो जाता है। स्पर्श बाण के सामने
वह सब दुःख भूल जाता है। पुरुष भी इस कोमल स्पर्श का
अनुभव जब कामिनी में करता है तब उन्मत्त की भाँति सब कुछ
भूल जाता है और उसके सामने काम ही काम दिखाई देता है।
इसी लिए ब्रह्मचारी को (केलिः) स्त्रियों के साथ खेलने को मना
किया है। क्योंकि उसमें अंग-स्पर्श होना सम्भव होने से स्पर्श
बाण का प्रयोग अनिवार्य है।
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