रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र १७१
मधुर वाद्य को लेकर वन में बजाते फिरते हैं। जब मृगों का झुण्ड
दिखायी देता है तब उसके पास से वाद्य-स्वर उत्तान कर निकलते
हैं। मृगों का झुण्ड का झुण्ड उस वाद्य-स्वर की मधुर तान को
सुनते ही खाना-पीना छोड़कर मस्त हो जाता है और उस बहेलिये
के पीछे-पीछे चलने लगता है। मीलों का चक्कर लगाते-लगाते जब
वह बहेलिया जाल के पास आकर कुछ आगे बढ़ जाता है और
मृग-झुण्ड जाल के फन्दे के नीचे आ जाता है तब दूसरे लताकुञ्ज
में छिपे हुए बहेलिये जाल की रस्सी खींचकर उस झुण्ड को जाल
में फँसा लेते और मार डालते हैं। यह है काम का शब्द-बाण जो
पशुओं पर भी काम करता है। इसी शब्द-बाण के फेर में पड़कर
मनुष्य तवायफों के फन्दे में फँसकर अपना सर्वस्व नाश कर देते
हैं। इसी बाण के प्रभाव से कृष्णचन्द्रजी ने काले विषधर साँप को
नाथा था, यह जगत-प्रसिद्ध बात है। आभूषणों की झँकार कामी
जनों के हृदय में काम का संचार करती है। इसीलिए ब्रह्मचर्य-
अवस्था में ( कीर्त्तनम् ) स्त्रियों का गुण कीर्त्तन करना या सुनना
मना किया है।
स्पर्श बाण
स्पर्श विषयक बाण भी कामज-बाण है। कोमल त्वचा का
स्पर्श कामोत्पादक है, क्योंकि कोमल त्वचा में स्पर्श बाण का शीघ्र
प्रयोग होता है। युवक-युवतियों के स्पर्श-मात्र से उनके शरीर में