रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८० असली कोकशास्त्र
काम के पाँच बाण
'कामः पञ्चशराः स्मृतः'
कामदेव के पाँच बाण माने गये हैं। वे कौन-कौन से हैं इस पर
विचार किया जायगा। यह पञ्चशरी कामदेव अपने किसी न किसी
बाण से नर-नारियों को बींध लेता है । उन बाणों का कोई क्रम
नहीं निश्चित किया जा सकता, क्योंकि उनका प्रयोग अलग-अलग
होता है। शब्द, स्पर्श, रूप रस, गन्ध, ये कान, त्वचा, आँख,
जिह्वा और नासिका आदि के विषय हैं। इन्हीं को बाण समझना
चाहिए। प्राणी इनके पीछे अन्धा होकर प्राण गँवा बैठता है. इस
लिये इनको बाण कहा गया है।
शब्द बाण
यह ऐसा बाण है जिस समय इसका प्रहार होता है उस समय
प्राणी अपने आपे में नहीं रहता। जब यह व्यंग या कठोर रूप से
प्रयोग में लाया जाता है तब यह कलह या युद्ध उत्पन्न कर विनाश
का हेतु बन जाता है। उस समय इसे वाग्बाण कहते हैं। वह काम
बाण नहीं कहाता। शब्द बाण से विद्ध प्राणी मूक की भाँति प्राण
गँवाता है। जिसका नीचे एक उदाहरण दिखाया जाता है।—
जंगली मृग को पकड़ने के लिए जब बहेलिये बन में जाते हैं,
तब वे जंगल के किसी भाग में जाल लगा देते हैं और आप किसी