रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र १६६
पूर्णिमा और अमावस्या
दर्शे पूर्णेतिथौ च नर्तितानखाः स्कन्धस्थलीरङ्गतोऽ
नङ्गागारचुचूलिकाञ्चितकराः कुर्युः स्त्रियांविह्वलाम् ॥
पूर्णिमा और अमावस्या को यदि पुरुष स्त्री-प्रसंग करे तो उन्हें
सम्पूर्ण कलाओं का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि काम सम्पूर्ण
शरीर में व्याप्त होता है। पन्द्रहवें दिन सम्भोग से जो कन्या पैदा
होती है वह पतिव्रता, धार्मिका सुन्दरी और यशस्विनी होती है।
इस दिन के गर्भाधान से बड़ा प्रतापी पुण्यवान् पुत्र उत्पन्न होता
है। जैसे कहा है—
षोडशे दिवसे गर्भो जायते यदि वै स्थिरः ।
चक्रवर्ती भवेद्राजा जायते नात्र संशयः ॥
निषिद्ध मैथुन
रजसाभिप्लुतां नारीं यो नरो ह्युपगच्छति ।
प्रज्ञातेजोबलं चक्षुरायुस्तस्य प्रहीयते ॥ मनु०
रजस्वला स्त्री से सम्भोग करने से पुरुष की आयु, बल, बुद्धि,
तेज और नेत्रशक्ति क्षय को प्राप्त होती है। इस लिए रजस्वला
स्त्री से कभी भूलकर भी मैथुन न करना चाहिए और जिन-जिन
तिथियों को निषेध किया गया है उन-उन का सर्वदा त्याग कर देना
आवश्यक है।