रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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अधर का चुम्बन करता हुआ युवती की आँखें खोले । इस क्रिया
से वह द्रवित हो जायगी । इस तिथि का गर्भज पुत्र गुणवान शील
स्वभाव वाला होता है ।
त्रयोदशी तिथि
चुम्बन् गण्डततीं मनोभवतिथौ मृद्गन् ससीत्कं कुचौ
कान्तां द्रावयति द्रुतंकररुहैर्भिन्दन् शनैःकन्धराम् ॥
त्रयोदशी को स्त्री के उरु केन्द्र में काम का अधिवास होता
है । अतः अन्य अंग मदन करता हुआ उस प्रदेश का विशेष मर्दन
करे । इससे स्त्री तृप्त होती है । स्त्री-प्रसंग में यह भी वर्जित तिथि
है । इस रात्रि के गर्भ से उत्पन्न कन्या कुल में दाग लगाने वाली
कुलटा होती है ।
चतुर्दशी तिथि
कन्दर्पारितिथौ विचुम्बितदृशो दोर्मूलचश्वन्नखाः,
कामागारनिवेशितद्विपकराः क्रीडन्ति कान्तातनौ ॥
चतुर्दशी के दिन स्त्री के सब शरीर में काम का वास होता
है । अतः सम्पूर्ण कलाओं का प्रयोग करना चाहिए । इस दिन
दोनों को विशेष आनन्द का अनुभव होता है । इस चौदहवीं रात्रि
का गर्भज पुत्र धार्मिक, यशस्वी और सुशील होता है ।