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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 172, कुल 440 में से

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असली कोकशास्त्र १६७
दशमी के दिन स्त्रियों का काम जगाने के लिये माथे का चुम्बन,
अन्य सभी कामोत्तेजक स्थानों पर दन्त-दशन, नखच्छेद, मर्दन
आदि करते हुए कड़ा आलिंगन करने से काम जाग जाता है ।
दशमी के सहवास का पुत्र हमेशा स्वस्थ बल-पौरुषयुक्त होता है ।
एकादशी तिथि
एकादश्यां करकलितग्रीवमालिङ्ग्य गाढं,
पायं पा यं दशनवसनं किंचिदालीढलोलम् ।
घातंघातं हृदि सहसितं मन्मथागारमुद्रा-
भङ्गक्रीडातरलितकराः कामिनीं द्रावयन्ति ॥
एकादशी को नितम्ब देश में काम का वास होता है । अतः
अन्य सभी स्थानों में यथाविधि कामोत्पादन-कलाओं का प्रयोग
करते हुए नितम्ब का खूब मर्दन करे । इससे स्त्री रतिसुख को प्राप्त
होती हुई स्रवित होगी । इस तिथि में भी सम्भोग न करना चाहिए ।
एकादशी के सहवास से उत्पन्न कन्या गुप्त-व्यभिचारिणी अथवा
वेश्या होती है ।
द्वादशी तिथि
द्वादश्यां परिरभ्य गाढमसकृच्चुम्बन् कपोलौ दृशो-
रुन्मेषं विदधीत सीत्कृतिजुषो व्यादष्टदन्तच्छदः ॥
द्वादशी को बार-बार गले लगाकर आलिंगन चुम्बन आदि करे ।