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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 171, कुल 440 में से

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१६६ असली कोकशास्त्र
अष्टमी तिथि
अष्टम्यां परिरभ्य कण्ठमसकृन्नाभिं नखैरश्चन्,
दष्टौष्ठः पुलकं ददत्कुचतटीं चुम्बेद्विमृष्ट्योच्चकैः ॥
अष्टमी के रोज नखों से नाभि को खींचकर नारी को पुलकित
अधरपान करता हुआ, कुचों को मले तथा विविध चुम्बन से स्त्री को
द्रवित करे। इस दिन के संयोग से जो संतान होती है वह धनी-
मानी होती।
नवमी तिथि
नाभीमूलं विलोलपाणिरधरं दष्ट्वा स्तनौ पीडयन्,
मृद्गीयान्मदनालयंचार्वलिखन् पार्श्वे नवम्यांनखैः ॥
नवमी के दिन स्त्री द्रवित करनेके लिये, अधरपान करता हुआ
नाभि और पेडू पर हाथ फेर कर मृदु मर्दन करे। भगोष्ठों को अंगु-
लियों से सहलाता हुआ स्तन और नितम्बों पर नखदान करे ।
नवमी तिथि के सहवाश की कन्या सौभाग्यवती सुन्दरी होती है।
दशमी तिथि
ललाटमाचुम्ब्य नखैर्लिखन्तः,
शिरोधरां आमितवामहस्ताः ।
कटिस्तनोरः स्थलपृष्ठमध्ये,
स्मरं दशम्यां प्रतिबोधयन्ति ॥