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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

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असली कोकशास्त्र १६५
षष्ठी तिथि
षष्ठ्यां गाढविगूढगात्रमधरं दष्ट्वाऽर्थ नाभीतले,
प्रारब्धच्छुरितो लिखेत्कररुहैरूर्वोस्तटी रुन्मदः ॥
षष्ठी तिथि में स्त्री को द्रवित करते समय नाभी के अधोभाग
में नखच्छेद करे। अधरपान और जंघाओं के सन्धिस्थल में नख-
छुरित करे। इस दिन का गर्भज बालक मध्यम श्रेणी के गुणों
वाला होता है।
सप्तमी तिथि
मृदितमदनवासो दन्तवासो लिह्हानः,
करजकलितकण्ठोपान्तवक्षःकपोलः ।
कृतघनपरिरम्भः संभृतानंगरंगो,
गमयति मृदुभावं भामिनीमन्हि भानोः ॥
सप्तमी के दिन प्रसन्न चित्त होकर स्त्री के ओष्ठों का चुम्बन
करे, जंघा का सन्धिस्थल, कण्ठ, वक्ष और कपोलों पर नख
विलेखन करे। यह भी निषिद्ध रात्रि है, इस तिथि के सम्भोग से
जो कन्या होती है वह कुल को दाग लगाने वाली होती है । कोई
इस तिथि में सन्तानाभाव मानते हैं ।