रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
पृष्ठ 167, कुल 440 में से
संदर्भ में पढ़ें१६२ असली कोकशास्त्र
प्रतिपदा तिथि
कंठे संश्लिष्य गाढं शिरसि विदधतश्चुम्ब-
मोष्ठौरदाग्रै, रापीड्याचुम्ब्य गण्डौ विरचितपुलकाः
पृष्ठतःपार्श्वयोश्च। दत्त्वा सूक्ष्मं नखांकं मृदुकरज-
मुखैरश्रयन्तो नितम्ब, प्राग्भारं मन्दसीत्काः प्रतिपदि
युवतीं नागरा द्रावयन्ति ॥
ऋतुस्नाता की प्रथम तिथि अर्थात् प्रतिपदा को भोगी पुरुष
स्त्री के कण्ठ का आलिंगन करता हुआ ललाट ओर गाल का चुम्बन
करे, फिर अपने दाँतों से ओष्ठों को दबाकर होठों का चुम्बन करे ।
तत्पश्चात् अगल-बगल के स्थानों को मृदु तीव्र स्पर्श द्वारा अर्थात्
चिकोटी नखच्छेद आदि से रोमाञ्चित करे ओर नितम्ब आदि देशों
के अग्रभाग को गुदगुदा कर सीत्कार करती हुई युवती को द्रवित
करे । किन्तु इस तिथि में स्त्रो-सहवास न करना चाहिए । कारण
गर्भ नहीं ठहरता । यदि स्थिर भी हो जाय तो बालक जन्मते ही
मर जाता है और मैथुन करनेवाले पुरुष की आयु घटती है ।
द्वितीया तिथि
स्तनमिलतसुखार्त्तौ गण्डगण्डौ विचुम्बन्,
नयनकुचयुगं चाकृष्य पार्श्वं नखाग्रैः