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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 168, कुल 440 में से

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असली कोकशास्त्र १६३
अधरमवलिहन् दोर्मूलचञ्चन्नखाग्रू,
कृतघनपरिरम्भो द्रावयेदहियुग्मे ॥
द्वितीया को स्तनमर्दन तथा उनका आकर्षण विकर्षण करता
हुआ गालों और आँखों का चुम्बन करे । अधरपान करता हुआ
नितम्बों पर चुटकी तथा कन्धों पर नखदान करे । ततः गाढ़ आलि-
ङ्गन द्वारा स्त्री को स्खलित करे । यह तिथि भा सहवास के योग्य
नहीं । कारण यह कि इस दिन संयोग से स्त्री के गर्भाशय को
हानि पहुँचती है । गर्भ रह जाय तो बच्चा गर्भ ही में मर जाता है ।
पुरुष को भी उपदंश रोग हो जाया करता है ।
तृतीया तिथि
तृतीयायां श्लिष्यन्निबिडनममासाद्य पुलकं,
मुहुर्बाहोर्मूले मृदुलिखितपार्श्वः कररुहैः ।
भुजापीडं कण्ठे दशनवसनास्वादतरलः,
स्तनोपान्तारब्धच्छुरितमबलां विह्वलयति ॥
तृतीया को गले में बाहु डालकर आलिंगन करता हुआ नितम्ब
और कन्धों को नखक्षत करे । स्थान-स्थान पर दन्त-दशन का
प्रयोग करता जाय । इस तिथि को भी त्याज्य समझा गया है ।
इस दिन के सहवास से जो सन्तान उत्पन्न हो जाती है, वह किसी
न किसी अंग से हीन होती है । सदैव रोगी रहने वाली तथा
अल्पायु भी होती है ।