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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 165, कुल 440 में से

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१६० असली कोकशास्त्र
से सिद्ध हो सकता है। स्त्री को जिस प्रकार चक्कर लगाने में सरलता
पड़े उस प्रकार पुरुष को सहायता करनी चाहिए।
प्रेङ्खोलित मैथुन
जघनमेव दोलायमानं सर्वतो भ्रमयेदिति प्रेङ्खोलितम्
युक्तयन्त्रैव ललाटे ललाटं निधाय विश्राम्येत् ॥
भ्रमरक मैथुन करते हुए यदि स्त्री अपने नितम्बभाग को झूले
की तरह झुलाती रहे तो उसे प्रेङ्खोलित मैथुन कहते हैं। उपरोक्त
मैथुन करते हुए जब नारी थक जाय तब यन्त्रयुक्त रहती हुई पुरुष
के माथे पर अपना माथा रखकर थकावट मिटाये। जब रतिक्रिया
समाप्त हो जाय तब अलग हो जाय।
कामकला के स्थान
आकाशस्थ चन्द्रकला के समान स्त्रियों के शरीर में कामकला
का विकास और अन्त होता है। ऐसा कामकला विशारदों का
निर्णय है। इस निर्णय से लोग प्रायः यह समझ लेते हैं कि चन्द्र
जिस तिथि का हो उस तिथि में बतलाये हुए अंग में काम वास
करता है। यह उनके समझने की भूल है। स्त्री के शरीर में काम
के स्थान परिवर्त्तन का कोई सम्बन्ध नहीं है। चन्द्रकला की वृद्धि
के समान, काम शरीर में स्थान परिवर्त्तन करता रहता है, इस
उपमा से ही यह भ्रम पैदा हुआ। यथार्थतः स्त्री जब ऋतु स्नान से