रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र १५६
पुरुष लिंग को यनि से बाहर न निकाल कर भीतर ही भीतर
बारम्बार लगातार आघात करे तो उसे चटकविलसित मैथुन कहते
हैं। यह प्राय रतिक्रिया की समाप्ति पर किया जाता है।
सम्पुट-मैथुन की विधि पहले आसनों में दिखलाई जा चुकी है।
पुरुषोपसृप्त मैथुन दिखाने के बाद अब पुरुसाइट अर्थात
विपरीतासन के भेद दिखाते हैं। जो नीचे दिखाये तीन प्रकार के
हैं। जैसे संदंश भ्रमरक प्रहोलित। जिनका प्रयोग केवल स्त्री की
ओर से किया जाता है।
संदंश मैथुन
वाडवेन लिङ्गमवगृह्य निष्कर्षन्त्या पीडयन्त्या
वा चिरायस्थानं संदंशः ॥
पुरुष के ऊपर चढ़कर संभोग करती हुई नारी अपने भगोष्ठों
में पुरुष की कामेन्द्रिय को जोर से पकड़ कर देर तक खाँचकर पीडन
करती हुई मैथुन करतो है उसे संदंश मैथुन कहते हैं। घोड़ी घोड़े
के साथ इसी प्रकार मैथुन करती है।
भ्रमरक मैथुन
युक्तयन्त्रा चक्रवद्भ्रमेदिति भ्रमरक आभ्यासिकः।
सम्भोग के समय यन्त्रयोग को अलग न करते हुए जो स्त्री
चक्र के समान घूमती है उसे भ्रमरक मैथुन कहते हैं, यह अभ्यास