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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 163, कुल 440 में से

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१५८ असली कोकशास्त्र
पुरुष अपनी कामेन्द्रिय को स्त्री के भगोष्ठ तक खींचकर जोर
से प्रहणन करे । इसको निर्घात मैथुन कहते हैं । यह स्त्री पुरुष
दोनों के अत्यन्त कामपीड़ित हो जाने पर किया जाता है । क्योंकि
वे ही इस चोट को सहन करते हुए आनन्द का अनुभव करते हैं ।
अन्यथा इसका अप्रिय असह्य कटुरस आस्वादन करना पड़ता है ।
वराहघात मैथुन
एकत एव भूपिष्ठमवलिखेदिति वराहघातः ।
स्त्री के मदन-गृह में यदि पुरुष किसी एक ही ओर को चोट
मारे तो उसे कराहघात मैथुन कहते हैं । सूअर सम्भोग करते समय
एक ही ओर को आघात करता रहता है । यह उसका स्वभाव है
इस लिये इस मैथुन का नाम वराहघात पड़ गया है ।
वृषाघात मैथुन
स एवोभयतः पर्यायेण वृषाघातः
यदि वराहघात की भाँति दायें-बायें दोनों ओर ध्वजा घात
किया जाय तो उसे वृषाघात मैथुन कहते हैं । यह बैल के अनुकरण
से वृषाघात कहा गया है ।
चटकविलसित मैथुन
सकृन्निमिश्रितमनिष्क्रम्य द्वित्रिश्चतुरिति घट्टये-
दिति चटकविलसितं रागा वसा निकम् ॥