रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र १५५
से "सी-सी" शब्द करना, ये सब द्रवितकाल में स्त्रियों के तृप्ति
के लक्षण हैं। उस समय खूब सावधानी से पुरुष को स्त्री का सह-
योग देना चाहिए । देशकालज्ञ पति को स्त्री बहुत प्रेम करती है।
अतृप्ति के लक्षण
हस्तमाधुवति हन्ति नो ददा-
त्युज्झितं झटिति लंघयेदिति ।
स्वेच्छया श्रमिणि वल्लभेऽथवा,
योषिदाचरति पुरुषायितम् ॥
अतृप्त स्त्री के हाथ काँपते हैं, पति को ताड़ती है छोड़ना नहीं
चाहती, विपरीतासन करने के लिए पति के ऊपर सवार हो जाती
है । लज्जाविहीन होकर पुरुषों का सा आचरण करती है । ये सब
उसके अतृप्ति के लक्षण हैं। पुरुष को उचित है कि यदि वह स्त्री
को तृप्त न कर पाता हो तो निम्न प्रयोग करे ।
तस्याः प्राग्यंत्रयोगात्करेण संबाधं गज इव
क्षोभयेदामृदुभावात् ततो यन्त्रयोजनम् ॥
सम्भोग क्रिया आरम्भ करने के पूर्व, स्त्री की योनिमें रहनेवाले
भगांकुर को अँगुली के मृदुस्पर्श से स्निग्ध करे, और साथ-साथ
मर्दन, स्पर्शन चुम्बन दन्तदशन आदि कलाओं का भी प्रयोग करता
रहे । इस प्रकार करने से जब स्त्री की कामवासना पूर्णरूप से जागृत
हो जाय तब सम्भोग आरम्भ करे । इस विधि से दोनों एक साथ