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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 159, कुल 440 में से

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१५४ असली कोकशास्त्र
अनुराग वृद्धि के लक्षण
गात्राणां सूं्रसनं नेत्रनिमीलनं व्रीडानाशः ।
समधिका च रतियोजनेति स्त्रीणां भावलक्षणम् ॥
शरीर की शिथिलता, नेत्रों का बन्द करना, लज्जा का नाश,
योनि संकोचन करने की चेष्टा करना, पुरुष कामेन्द्रिय के साथ
योनि का विशेष घर्षण करना, अनुराग वृद्धि के लक्षण हैं।
द्रवितकाल के लक्षण
हस्तौ विधुनोति स्विद्यति दशत्युत्थातुं न ददाति
पादेनाहन्ति रतावसाने च पुरुषातिवर्तिनी ॥
वीर्य क्षरण काल में स्त्री दोनों हाथों को कँपाती और पसीने
पसीने होकर काटती हुई इतना खींचकर चिपका लेती है कि पुरुष
को अलग होने नहीं देती। पाँव से ताड़ती हुई भोग सन्तुष्ट पति
को टाँगों में दबा लेती है।
श्लेषयेत्स्वजघनंमुहुर्मुहुः,
सीत्करोति मदगर्विताकुला ।
भावसिद्धिसमयस्य सूचकं,
वक्ष्यमाणरतेस्तु लक्षणम् ॥
जंघाओं का बार-बार सिकोड़ना, और काम-विह्वल होकर मुख