सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 161, कुल 440 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 161

१५० असली कोकशास्त्र
अवश्य तृप्त होंगे । यह विधि हाथी के भोग-विलास की है वह
पहले अपनी सूँड से हस्तिनी के भगांकुर को मर्दन करता है । जब
वह कामातुरा हो जाती है तब भोग करता है । इससे हस्तिनी सदैव
तृप्त और गर्भवती होती है । अब इसके बाद मैथुन के भेदों पर
विचार किया जायगा । मैथुन के दस भेद हैं । जैसे—उपसृप्तक,
मन्थन, हुल, अवमर्दन, पीडितक, निर्घात, वराहघात, वृषघात,
चटिक-विलसित और सम्पुट । इन दस मैथुनों को मनुष्य करता है ।
इस लिए यह पुरुषोपसृप्त कहाता है ।
उपसृप्तक मैथुन
न्याय्यमृजुसंमिश्रणमुपसृप्तकम् ।
जो साधारण रीति से स्त्री-पुरुष सम्भोग करते हैं उसे उपसृप्तक
मैथुन कहते हैं । क्योंकि वह सुगम और योग्य भी है ।
मन्थन मैथुन
हस्तेन लिंगं सर्वतो भ्रामयदिति मन्थनम् ।
अपनी कामेन्द्रिय को जब पुरुष स्त्री की योनि में डालकर
घुमावे तब उसे मन्थन मैथुन कहते हैं । इस प्रकार का मृदु उपचार
काम जगाने के लिए किया जाता है । अति कोमलांगी स्त्रियों के
साथ ऐसा मैथुन किया जाता है ।
—:०:—