रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र १५१
मुख मिलाकर सर्वाङ्ग निपीडित करता हुआ जब सम्भोग करता
है, तब वह कौर्म आसन कहाता है ।
ऊर्ध्वगतोरुयुग आसन
कौर्म आसन की भाँति यह भी आसन होता है। इसमें केवल
इतनी विशेषता है ‘कि रमण करते समय पुरुष की टाँगें ऊपर की
तरफ हों तो वह ऊर्ध्वगतोरुयुग आसन कहाता है ।
परिवर्तित आसन
टाँगें ऊपर करते समय यदि स्त्री अपनी योनि का संकोच-
विकाश करे तो उसे परिवर्तित आसन कहते हैं ।
समुद्र आसन
टेढ़ी करवट लेटी हुई स्त्री की जंघा में टेढ़े सोकर जंघा से
जंघा मिलाकर रमण करने को समुद्र आसन कहते हैं ।
परिवर्तनक आसन
स्त्री या पुरुष पहले समुद्रक यन्त्र की विद्या को करके फिर
उलटी तरह फँसाकर रमण करे तो उसे परिवर्तनक आसन कहते हैं ।
युग्म पद्मासन
एक पैर फैलाकर दूसरा सिकोड़ कर बैठी हुई स्त्री के साथ
उसी प्रकार बैठकर पुरुष उसके साथ जकड़ कर आलिंगन चुम्बन
करता हुआ सम्भोग करे तो उसे युग्मपद आसन कहते हैं ।