सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 155, कुल 440 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 155

१५२ असली काकशास्त्र
विमर्दितक आसन
यदि स्त्री की कोहिनी के बीच में अपनी कटिभाग को फेरता
हुआ भोग करे तो उसे विमर्दितक आसन कहते हैं ।
विपरीत आसन
पिय को तिय नीचे करे, पिय सम भाव दिखाय ।
आसन है विपरीत यह, पिय तिय के मन भाय ॥
विपरीतासन का प्रभाव
सा प्रकीर्यमाणकेशकुसुमाश्वासविच्छिन्नहासिनी
वक्त्र संसर्गार्थं स्तनाभ्यामुरः पीडयन्ती पुनः पुनः
शिरो नमयन्ती याश्चेष्टाः पूर्वमसौ दर्शितवांस्ता एव
प्रतिकुर्वीत पानिता प्रतिपातयामीति हसन्ती तर्ज-
यन्ती प्रतिघ्नती च ब्रूयात् पुनश्च व्रीडां दर्शयेच्छ्लूमं
वीरामाभीप्सां च, पुरुषोद्यंसृप्तैरेवोपसर्पेत् ॥
विपरीतासन से ही स्त्री के स्वभाव का पता चलता है । जब
वह पुरुष के ऊपर आ जाती है तब वह जिस प्रकार अनंग की
उत्पत्ति होती है उन-उन उपायों का अवलम्बन करती है । उसे क्या
प्रिय है और वह किस प्रयोग से तृप्त होती है, इस बात का परिचय
भलीभाँति विचारशील पुरुष को लग जाता है । पुरुषारूढ़ होकर