रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र १४७
संकुचित करने के लिये यदि स्त्री अपनी दोनों जंघाओं को आपस
में लिपटा ले तो उसे वेष्टितक आसन कहा जायगा ।
वाडविक आसन
अल्प वीर्य पुरुष की कामेन्द्रिय को स्त्री जब अपने भगोष्ठों से
खूब दबाकर अन्दर की ओर खींचती है, तब उसे वाडविक आसन
कहते हैं।
भुग्नक आसन
सौवर्णनाभास्तू भावप्पूरू उर्ध्वा वितितद्भुग्नकम् ।
स्त्री की जंघाओं को ऊपर उठाकर अधोभाग से जो मैथुन
किया जाता है, उसको भुग्नक आसन कहते हैं।
जृम्भितक आसन
पुरुष स्त्री की जंघाओं को अपने कन्धे पर रखकर जब भोग
करता है, तब उसे जृम्भितक आसन कहते हैं।
ऊरुस्फुटन आसन
स्त्री की दोनों मिली हुई जंघाओं को पुरुष अपने हाथ से पकड़
छाती से लगाकर रमण करे तो उसे ऊरुस्फुटन आसन कहते हैं।
उद्भुग्न आसन
ऊरुस्फुटन आसन के समान ही यह भी आसन किया जाता
है। इसमें केवल जंघा छाती से नहीं लगायी जाती।