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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 149, कुल 440 में से

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१४६ असली कोकशास्त्र
हस्तिनी के साथ जब शश पुरुष सम्भोग करे तब हस्तिनी को
सम्पुट पीडितक, वेष्टितक, वाडवक संज्ञक योनि संकोचक आसनों
से काम लेना चाहिये ।
सम्पुटक आसन
सरलीकृतजंघमुरौ मिलितौ,
यदि सम्पुटको भवति द्विविधः ।
उत्तानकपार्श्वेशाच्यु वतेः.
स च पीडितमूरुनिपीडनतः ॥
भोग करते समय स्त्री पहले अपने पैरों को फैलाकर तत्पश्चात्
जंघा को ढीला कर दोनों पैरों को मिला दे । इसको सम्पुटक आसन
कहते हैं । इसके दो भेद हैं, यदि स्त्री सीधी लेटी रहे तब उत्तान्
सम्पुट, और यदि तिरछी करवट लेटी रहे तो पार्श्व सम्पुट भेद
हो जाता है । पार्श्व सम्पुट आसन करते हुए पुरुष को स्त्री के
दाहिने तरफ रहना चाहिए । इसमें सब आचार्य एकमत हैं ।
पीडितक आसन
सम्पुट की भाँति सम्भोग करते हुए यदि स्त्री अपनी जंघाओं
को खूब संकुचित करे तो उसे पीडितक आसन कहते हैं ।
वेष्टितक आसन
उत्तान सम्पुट की भाँति भोग करते हुए योनि को अत्यन्त