रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४ असली कोकशास्त्र
महाराज ने कहा,—अच्छा तो आप इसको सन्तुष्टि का साधन
बतला दें ।
कोका पण्डित ने रमणी से कहा,—तुम मेरी एक बात मानोगी ?
रमणी ने कहा,—हाँ मानने योग्य होगी तो अवश्य मानूँगी ।
मन्त्री ने कहा,—तुम अपने सदृश्य रूप-यौवन-सम्पन्न किसी
पुरुष से विवाह कर लो। मैं तुम्हारी तृप्ति उसी पुरुष से करा
दूँगा, यह मेरी प्रतिज्ञा है। यदि मैं तुम्हारी इच्छा पूरी न करा
सकूँगा, तो मन्त्री पद का त्याग कर दूँगा। मुझे विवाह से पूर्व उस
पुरुष को दिखा देना। अस्तु, घर का पता राज-दर्बार में लिखा दो
और घर जाओ ।
रमणी मन्त्री के कथनानुसार दर्बार से चली गयी ।
[ ४ ]
एक वर्ष के बाद गोद में बालक लिये एक रमणी ने दर्बार में
प्रवेश किया। उसके साथ एक खूबसूरत नौजवान आदमी भी था।
रमणी ने महाराज को सनम्र झुककर प्रणाम किया और बोली,—
महाराज की जय हो !
महाराज ने कहा,—क्या पारसाल दर्बार में आप ही आयी थीं ?
रमणी ने कहा,—हाँ महाराज ! मैं ही आयी थी। आपके
प्रधान मन्त्री कोकापण्डित जी की वाणी सत्य हुई। आज मैं
अपनी सखियों के साथ बड़े सुख से हूँ। मेरी सखियाँ भी पंडित
जी के बताये उपाय से काम ले रही हैं। उनकी भी मनोकामनायें