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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 148, कुल 440 में से

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पृष्ठ 148

१० असली कोकशास्त्र १४५
इन्द्राणिक आसन
निजमूरुयुगं सममादधती,
प्रियजानुनि योजयति प्रमदा ।
यदि पार्श्वत एव चिराभ्यसना-
दिन्द्राणिकमुक्तमिदं करणम् ॥
जब स्त्री दोनों जंघाओं को मिलाकर पति की एक जंघा पर
रखकर भोग करती है, उसको इन्द्राणिक आसन कहते हैं।
तथाच्चतरतस्यापि पारेग्रह ।
उपरोक्त तीनों आसनों में चाहे कैसा भी उच्चरत क्यों न हो,
अत्यन्त सुख के साथ सम्भोग होता है, ओर सभी उच्चरत वालों
को पूर्ण आनन्द मिलता है ।
सम्पुट आसन
सम्पुटेन प्रतिग्रहो नीचरते ।
नीच रत वाले जोड़ों को सम्पुट से आनन्द मिलता है, अर्थात्
बड़वा, हस्तिनी आदि शश के साथ संभोग करते समय अपनी
जंघाओं को सिकोड़ लें । इस प्रकार सम्पुट करने से नीचरत भी
समरत के समान सुख पहुँचाता है ।
एतेन नोचतररतेपि सम्पुटकम् पीडितकम्
वेष्टितकम बाडवकमिति हस्तिन्याः ।