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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 147, कुल 440 में से

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१४४ असली कोकशास्त्र
उत्फुल्लक आसन
करयुग्मधृतत्रिकमूर्ध्वलसज्जघनं
पतिहस्तनिविष्टकुचम् ।
स्फिग्विम्बबहिर्धृ तपाष्णियुगं,
द्यु त्फुल्लकयुक्तमिदं करणम् ॥
स्त्री अपने नितम्ब के ऊपरी भाग को तकिये के सहारे ऊपर
उठाकर पति के नितम्बों को अपने हाथ की हथेलियों के सहारे
ऊपर उठाये रहे, और पुरुष दोनों हाथ से स्त्री के स्तनों का मर्दन
करे इसको उत्फुल्लक आसन कहते हैं ।
विजृम्भितक आसन
यदि तिर्यगुदञ्चितमूरुयुग,
दधती रमते रमणी रमणम् ।
विहिता पसृति र्विवृतोरु भगा,
भुवि जृम्भितमुक्तमिदं करणम् ॥
पुरुष के समान स्त्री अपनी जंघाओं को ऊपर उठाकर पति के
साथ तिरछे होकर भोग करती हुई स्वयं भी आगे-पीछे हिलती है,
उसकी योनि तथा जंघाएँ खुली रहती हैं, उसे विजृम्भितक आसन
कहते हैं ।