रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४० असली कोकशास्त्र
घृणा करते हैं और दूसरों को भी घृणा का उपदेश देते हैं, वस्तुतः
वे स्वयं ही नहीं समझ पाये, यही समझना चाहिए। इन आसनों
का निर्माण वात्स्यायन मुनि ने किया है। जिन्होंने न्याय-दर्शन पर
भाष्य किया है, जो एक बड़ा जबर्दस्त तार्किक ग्रंथ सुप्रसिद्ध है।
और भी अनेक आचार्यों ने इस विषय पर विचार किया, जिनका
आधार लेकर कोका पण्डित ने कोकशास्त्र का संकलन किया, ऐसे
दूरदर्शी लोकप्रसिद्ध अनुभवी महात्माओं के दिखलाये हुए मार्ग
नुकसान पहुँचाने वाले हों, ऐसा सम्भव नहीं समझा जा सकता।
यह दूसरी बात है कि उन आसनों के प्रयोग को हम भलीभाँति
समझ न सकने से इष्टार्थ लाभ न उठा सकें।
उपरोक्त आसन व्यवस्था जिन स्त्री-पुरुषों के लिये अत्यन्त
आवश्यक होती है, उनका वर्णन पहले किया जाता है।
आरोहपरिरोहाभ्यां षण्णवद्वादशाङ्गुलैः ।
गुह्यैः शशवृषोऽश्वाना हरिण्यश्वेभिकाः स्त्रियः ॥
शश पुरुष की मूत्रेन्द्रिय छः अंगुल लम्बी होती है। वृष संज्ञक
पुरुष की नौ अंगुल लम्बी, तथा अश्व पुरुष की बारह अंगुल लम्बी
इन्द्रिय होती है। इसी प्रकार छः अंगुल लम्बे चौड़े काम-मन्दिर
के परिमाण वाली हरिणी, नौ अंगुल परिमाण वाली अश्वा तथा
बारह अंगुल वाली हस्तिनी होती है।
जिन स्त्री पुरुषों के गुप्तांग परिमाण समान होते हैं, वे समरत
वाले कहलाते हैं। जैसे शश और हरिणी, वृष और अश्वा,