रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र १३७
गुजरात देश की स्त्रियाँ फूले हुए केशों को धारण करने वाली,
पतले शरीर वाली, मोटे स्तनों वाली, सुन्दर आँखों वाली, मीठा
बोलने वाली, भीतरी बाहरी दोनों प्रकार के सम्मार्गों को चाहने
वाली होती हैं।
लाट देश की स्त्रियाँ मन्द ताड़न करने से, नखक्षत, दन्तक्षत
आदि से शीघ्र द्रवित होने वाली तथा विशेष आलिंगन चाहने वाली
प्रचण्ड वेगवती कोमल शरीर वाली, रति-काल में विशेष आनन्द
से विभोर होने वाली होती हैं।
अयोध्या की स्त्रियों की योनि में अत्यन्त खुजली होती है।
इस लिए वे बनावटी लिंग से खूब ताड़न किये जाने पर द्रवित होती
हैं। स्त्री राज्य की स्त्रियों के भी यही स्वभाव होते हैं।
कोंकण देश की स्त्रियाँ अपने दोष छिपाने वाली और परदोषों
पर हँसने वाली होती हैं। चुम्बन, नख, दन्त, आदि क्षतों को
सहने वाली, मध्य वेगवती योनि द्वार से वीर्य को चूसने वाली
और अनेक विध रमण करने वाली होती हैं।
कामरू देश की स्त्रियाँ अत्यन्त कोमलांगी, बार-बार द्रवित
होने वाली, स्पर्श मात्र से सम्भोग के लिए तत्पर होने वाली, मधुर
भाषण करने वाली और सच्चरित्रा होती हैं।
उड़ीसा देश की स्त्रियाँ दन्त, नख आदि चिन्हों को चाहनेवाली
होती हैं।
अंग, बंग, कलिंग आदि देशों की स्त्रियाँ भग-भूषण (चमड़े