रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१३६ असली कोकशास्त्र
काठियावाड़ और लाट देश की स्त्रियाँ प्रचण्ड-कामिनी होती
हैं। और मैथुन काल में सीत्कार भी बहुत करती हैं।
बंगाल देश की स्त्रियाँ प्रहरण को अधिक पसन्द करती हैं,
और धातुज लिंग का भी प्रयोग करती हैं।
अन्ध्र देश की स्त्रियाँ, कोमलांगी, सम्भोग प्रिया, अश्लील
विचार रखनेवाली दुराचारिणी होती हैं।
महाराष्ट्र देश की स्त्रियाँ अनेक प्रकार की कलाओं को चाहने
वाली तथा स्वयं उनका ज्ञान रखने वाली, कड़े और गन्दे बचन
पसन्द करने वाली अति काम-विह्वला होती हैं।
पाटलीपुत्र देश की स्त्रियाँ महाराष्ट्र के समान खुला व्यवहार
करने वाली नहीं होतीं। वे एकान्त में ही कलाओं का प्रयोग करने
वाली होती हैं।
द्रविड़ देश की स्त्रियों की योनि से भोग के पहले ही थोड़ा
सफेद रज निकल आता है।
गौड़ देश की स्त्रियाँ मीठा बोलने वाली, कोमलांगी, अधिक
सम्भोग में अनुरागवती होती हैं।
आभीर देश की स्त्रियाँ प्रसन्न चित्त से आलिंगन चाहने वाली,
छाती आदि पर धक्का चाहने वाली, और चुम्बन से विशेष प्रसन्न
होने वाली होती है। नाखून और दाँतों के क्षत को विशेष नहीं
चाहतीं।
मालव देश की स्त्रियों का भी ऐसा ही स्वभाव होता है।