रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र १३५
देश भेद से नारी रमण
देशसात्म्याच्च योषित उपचरेत ।
प्रत्येक देश की प्रथानुसार स्त्रियों के साथ रमण करना चाहिए।
जो पुरुष तद्देशीय स्त्रियों के समान अपना स्वभाव बनाकर रमण
करता है, वह मनुष्य रति सुख का आनन्द प्राप्त कर लेता है ।
अन्यथा दोनों ही रति-सुख से वंचित रह जाते हैं, और प्रेम के
स्थान में द्वेषभाव उत्पन्न हो जाता है । देशानुसार स्त्रियों के स्वभाव
का आचार्यों ने जिस प्रकार वर्णन किया है, वह नीचे दिखाया
जाता है ।
मध्यदेश की स्त्रियाँ प्रायः आर्य स्वाभाव वाली होती है । जो
पवित्रता के कारण चुम्बन, नखक्षत, दन्तक्षत, आदि से घृणा करती
हैं । ऐसा व्यवहार करने वाले मनुष्य से भी घृणा करती हैं ।
वाह्णीक देश की स्त्रियाँ भी नख, दन्तक्षतादि को अच्छा
नहीं समझतीं ।
उज्जैन देशीया स्त्रियें भी उपरोक्त स्वभाव वाली होती हैं ।
इनका चित्रों में अधिक प्रेम होता है ।
मालव देश की स्त्रियां आलिंगन, चुम्बन, नखक्षत, दन्तक्षत
अधरपान आदि में रुचि रखती हैं । किन्तु अधिक नहीं । प्रहणन
को बहुत चाहती हैं ।
सिन्धु देश की स्त्रियां मुख मैथुन को अधिक पसन्द करती हैं ।