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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 136, कुल 440 में से

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असली कोकशास्त्र १३३
उच्छूनक दन्तक्षत
यह भी गूढ़क के समान ही होता है। किन्तु इसमें विशेषता
केवल इतनी ही होती है कि यह कुछ गूढ़क की अपेक्षा तीव्र होता
है। इसका प्रयोग विशेष काम वृद्धि पर अनायास हो जाता है।
प्रवालमणि दन्तक्षत
यह अधर तथा गालों पर दाँतों की पंक्ति की माला के समान
बन जाता है। इस लिए इसको प्रवालमणि दन्तक्षत कहते हैं।
विन्दु दन्तक्षत
अल्पदेशायाश्चत्वचो दशनद्वयसन्दंशजा विन्दुसिद्धिः
अधर, ओष्ठ के मध्यभाग में तिलमात्र दोनों दाँतों से काटने
पर जो विन्दु बन जाता है, उसको विन्दु दन्तक्षत कहते हैं।
विन्दुमाला दन्तक्षत
विन्दु दशन की भाँति अनेक दाँतों के क्षत विन्दुओं की पंक्ति
को विन्दुमाला दन्तक्षत कहते हैं। इस प्रकार विन्दुमाला, मणि-
माला नाम के दन्तक्षत, वक्षस्थल, कुक्षि और कपोल आदि स्थानों
पर निर्माण किये जाते हैं। प्रायः मांसल स्थान ही इसके लिए
उपयुक्त समझे जाते हैं।