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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 135, कुल 440 में से

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१३२ असली कोकशास्त्र
दन्तक्षत
चुम्बन में ओष्ठों के कोमल स्पर्श से जब काम विशेष उद्दीप्त
हो जाता है, तब चुम्बन स्पर्श का आनन्द तिरोहित-सा हो जाता
है, और नर-नारी उस समय विशेष कठोर स्पर्श से काम लेने की
चेष्टा करते हैं। उस अवस्था में दन्तक्षत की आवश्यकता पड़ती
है। जिन स्थानों पर चुम्बन किया जाता है, उन्हीं मांसल स्थानों
को ओठ और दाँतों में पकड़ कर जोर से दबाते हैं। यह क्रिया
दोनों की ओर से समान ही होती है। कभी-कभी दाँतों का निशान
बहुत गहरा हो जाता है। जो कई दिन तक बना रहता है। उसको
देखकर उन्हें रति-सुख का स्मरण हो आता है। यह क्रिया भी
रति उत्पन्न करने में परम सहायिका है।
गूढक दन्तक्षत
रागैःकलिङ्गमधरे किल गूढकं स्यादुच्छूनकं-
दशनवाससि वामगण्डे।
स्यात्पीडनात्तदधरोष्ठबिशेषयोगात्,
तत्र प्रवालामणिरभ्यसनेन साध्यः ॥
रमणी के अधर पर दाँत का चिन्ह मात्र कर देने को गूढ़क
दन्तक्षत कहते हैं। यह चिन्ह इतना स्वल्प होता है, कि जिसका
दर्शन ध्यान देने से ही हो सकता है। यथार्थतः ऐसा ही दन्तदशन
प्रशंसनीय समझा गया है।