सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 134, कुल 440 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 134

असली कोकशास्त्र १३१
जागृत हो जाता है। परदेश जाते समय पुरुष स्त्री के जंघा, स्तन
आदि पर नखक्षत स्मृति के लिए चिन्ह कर जाया करते हैं, और
पुरुष के भी अंगों पर रमणी चिन्ह बना देती हैं। जिन स्मारक
चिन्हों को प्रवास अवस्था में देखकर पति-पत्नि एक दूसरे का
स्मरण कर लेते हैं।
नखच्छेदों के भेदों की पूरी गणना कामशास्त्रज्ञ आचार्यों ने नहीं
की। हो भी नहीं सकती। उन लोगों का कथन है कि कामान्ध हो
जाने पर रति-क्रिया में प्रवृत्त पुरुष किन-किन विचित्र कौशलों का
अवलम्बन कर डालता है, उस अवस्था में उसे उनका स्वयं ज्ञान
नहीं होता। शास्त्र-मर्यादा केवल मार्गदर्शिका होती है। उसका
प्रयोजन सिद्ध हो जाने पर फिर उसके क्रम की आवश्यकता नहीं
होती। क्योंकि पुरुष अपनी बुद्धि से अनेक क्रियाओं का आविष्कार
कर लेता है। जिनसे कामानुराग बढ़ जाता है। यही सफलता
का चिन्ह है।
—:०:—