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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 133, कुल 440 में से

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१३० असली कोकशास्त्र
मयूरपद नखच्छेद
अङ्गुष्ठजं नखमधो विनिवेश्य कृष्टैः,
सर्वाङ्गुलीकररुहैरुपरि स्तनस्य ।
तच्चुचुकाभिमुखमेत्य भवन्ति रेखाः,
तज्ज्ञाः मयूरपद तकंदुदाहरन्ति ॥
रमणी के स्तन-मुख पर जब पाँचो अँगुलियों के नखों के
निशान बन जाते हैं, तब उसे मयूरपद नखच्छेद कहते हैं। अंगूठा
स्तन के नीचे की ओर लगाकर ऊपर की ओर चारों अँगुलियों से
दबाकर स्तन के अग्रभाग को नखों की ओर जोर से दबाकर
उछालने से यह मयूरपद चिह्न बन जाता है।
उत्पलपत्रक नखच्छेद
सर्वैः शशप्लुतमिदं करजैः कुचाग्रे,
ह्यन्वर्थमुत्पलदलं स्तनगुह्यपृष्ठे ।
रेखा घनास्त्रिचतुरा जघने स्तने वा,
स्मर्तुँ प्रवासगमने विदधुर्विदग्धाः ॥
रमणी के कटि भाग तथा स्तनों पर कमल की पत्तियों की
भाँति नखक्षत चिन्ह बना देने से उत्पलपत्रक नखच्छेद कहलाता
है। मांसल भागों पर नखक्षत लाल-लाल रंग के बड़े सुन्दर चित्ता-
कर्षक चिन्ह बन जाते हैं, जिन्हें देखकर नर-नारी दोनों में कामोद्वेग