रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६ असली कोकशास्त्र १२६
जिस समय नायक के अंगों को नायिका दबा रही हो, अथवा
तैल मर्दन कर रही हो, या मुहासे फोड़ रही हो, उस समय
नायिका आच्छुरित नखच्छेद का प्रयोग करती है । नायक भी
ऐसी ही किन्हीं दशाओं में इस कला का प्रयोग करता है ।
अर्धचन्द्र नखच्छेद
नायक नायिका के स्तनों पर अथवा गर्दन के किसी हिस्से पर
कामोद्वेग के समय नायिका में कामोद्वेग उत्पन्न करने के लिये इस
अर्धचन्द्र नखच्छेद का प्रयोग करता है ।
मण्डलक्षत नख च्छेद
यह गोल आकार वाला नखछत होता है । यह चिंगोटी करने
से आमने सामने दो अँगुलियों के नखच्छेद हो जाने से उत्पन्न हो
जाता है । इस लिए इसको मण्डलछत कहते हैं । इसका प्रयोग
प्रायः नाभि के नीचे भाग में लिया जाता है । नखच्छेद लम्बी रेखा
में न होना चाहिए । इसकी लम्बाई लगभग दो या तीन अँगुल के
हो सकती है, और योनि के उभरे स्थान पर भी इसका प्रयोग
किया जाता है ।
व्याघ्र नखच्छेद
इस रेखा का आकर कुछ खरोंच की भाँति टेढ़ा होने से इसे
व्याघ्र नखच्छेद कहते हैं ।