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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 128, कुल 440 में से

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पृष्ठ 128

असली कोकशास्त्र १२५
प्रतिकृतिशिशुचित्राश्लेषणं चुम्बनं वा,
द्वयमुपहितभावं तच्च संक्रान्तमाहुः ॥
दर्पण आदि में प्रतिबिम्ब को देखकर, चित्रों या बालक
बालिकाओं को प्रतिनिधि मानकर जो चुम्बन किया जाता है उसे
छाया चुम्बन और संक्रान्त चुम्बन कहते हैं । ये चुम्बन अत्यन्त
मुग्ध अवस्था में किये जाते हैं ।
चुम्बन द्यूत
यह चुम्बन हार जीत की नियत से किया जाता है । इससे
दम्पति में प्रेम की वृद्धि होती है । इसमें पत्नी की हार ही शोभा
देती है । स्त्री-पुरुषों में से जो कोई ग्रहणक विधि से दूसरे के अधर
ओष्ठ को पकड़ ले उसी की जीत समझी जाती है । इस क्रीड़ा में
अनेक विध छल-कपट से काम लेना पड़ता है । यह अन्य चुम्बनों
की भाँति सीधी-साधी सरल रीति से नहीं किया जाता । जब
पत्नी हार जाती है तब उसकी क्या हालत होती है इसका आचार्य
वर्णन करते हैं—
तत्र जिता सार्धरुदितंकरं विधुनुयात्प्रणुदेद्दशे-
त्परिवर्तयेद्वलादाहृता विवदेत पुनरप्यस्तु पण इति
ब्रूयात्, तत्रापि जिताद्विगुणमाधस्येत् ॥
वह हाथ पाँव को पीटती और सिसकियाँ भरती हुई खिन्न
होकर प्रणयी को धक्का देकर दूर हटाती है और दन्त-दशन या