रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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हुआ मुख चुम्बन तक आ पहुँचता है । उसके भेद क्रमशः नीचे
लिखे जाते हैं ।
निमित्तक चुम्बन
बलात्कारेण नियुक्ता मुखे मुखमाधत्ते-
न तु विचेष्टत इति निमित्तकम् ॥
नव-वधू को आग्रह पूर्वक जब पुरुष चूमने के लिये उसके
कपोलों पर मुख रख देता है, किन्तु वह संकोचवश कुछ चेष्टा नहीं
करती तो उस चुम्बन को निमित्तक चुम्बन समझना चाहिए । यह
चुम्बन सुहागरात को किया जाता है ।
स्फुरितक चुम्बन
वदने प्रवेशितं चौष्ठं मनागपत्रपाऽनुग्रहीतुमिच्छन्ती ।
स्पन्दयति स्वमोष्ठं नो नरमुत्सहते इति स्फुरितकम् ॥
नवोढ़ा स्त्री के अधरोष्ठ पर जब उसका पति अपने ओष्ठ रख
देता है, और वह उसके प्रत्युत्तर में चूमने की इच्छा करती हुई
लज्जावश केवल ओष्ठ हिलाकर रह जाती है, अथवा उद्वेग भाव से
ओष्ठ काँप जाते हैं, तब उस चुम्बन को स्फुरितक चुम्बन कहते हैं ।
घट्टितक चुम्बन
पत्नी पती के मुख पर रक्खे हुए ओष्ठ को कुछ पकड़ कर