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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 120, कुल 440 में से

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असली कोकशास्त्र ११६
यह भी लतावेष्टित के समान ही आलिंगन होता है; किन्तु
अन्तर इतना ही है कि कामोद्वेग में स्त्री अपने पैर से पुरुष के
एक पैर को दबाकर दूसरे पैर से उसकी जंघाओं को लपेटती हुई,
अपनी भुजा को पति के कक्ष भाग से कन्धे को पकड़ कर ऊपर की
ओर उठती हुई पति का चुम्बन करती है, इसको वृक्षादि रूढ़
आलिंगन कहते हैं ।
तिलतण्डुल आलिंगन
असकृदपि विगाढाश्लेषलीलां वितन्वन्,
जनितजघनबाहुव्यत्ययंस्पर्धयेव ।
मिथुनमथ मिथोऽङ्गे लीयते निस्तरंगं,
निगदति तिलपूर्वं तण्डुलं तन्मुनीन्द्रः ॥
यह आलिंगन लेटकर और खड़े होकर दोनों प्रकार से होता
है इसकी क्रिया प्रायः लतावेष्टित या वृक्षादिरूढ़ के समान ही
होती है। इसमें केवल अन्तर इतना ही है कि वे दोनों आलिंगन
मुख चुम्बन मात्र के लिये किये जाते हैं, और यह प्रत्येक अंग को
जोर से दबाकर एक रूपता लाने के लिए किया जाता है इससे
सम्पूर्ण शरीर में रति की जागृति हो जाती है। इस लिए इसको
तिल तण्डुल आलिंगन कहते हैं ।