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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 121, कुल 440 में से

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१२० असली कोकशास्त्र
क्षीरनीरालिंगन
अभिमुखमुपविष्टा योषिदंकेऽथ तल्पे,
रुचिररुचिरगाढालिंगनो वल्लभश्च ।
प्रसरदसम गावेशनश्यद्विचारौ,
विशत इव मिथोऽङ्गे क्षीरनीरं तदाहूः ॥
वही तिल तण्डुल आलिंगन करते हुए जब स्त्री पुरुष काम
पीड़ित होकर अपने आपको भूल जाते हैं अर्थात् जिस प्रकार दुध
और जल एक होकर भेद-भाव को मिटा देता है, उसी प्रकार स्त्री
पुरुष का अपनी अवस्था के भेद को भूल जाने से यह क्षीरनीरा-
लिंगन कहाता है।
उरुपगूढालिंगन
तत्रोरुसंदंशेनैकमूरूमूरुद्वयं वा सर्वप्राणं-
पीडयेदित्यूरूपगूढनम् ॥
काम-पीड़िता अबला की जंघाओं को अपनी जंघाओं में दबा-
कर जो पीड़न-क्रिया किया जाता है, उसको ऊरूपगूढ़ालिंगन कहते
हैं। यह आलिंगन आमने-सामने करवट लेते हुए स्त्री-पुरुषों में
किया जाता है। इससे मांसल भाग दबने से बहुत आनन्द
मालूम होता है।