रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११६ असली कोकशास्त्र
नजर बचाकर एकान्त में बैठी हुई स्त्री के स्तनों का मर्दन या
बगल आदि में गुदगुदा देना अथवा एकान्त में बैठे पुरुष को स्त्री
का गोदना या अपने स्तनों का उसके शरीर पर मर्दन करना
विद्धक आलिंगन कहाता है ।
पीडित आलिङ्गन
यात्रोत्सवादौ तिमिरे घने वा,
यदृच्छतः स्याच्चिरमङ्गसङ्गः ।
उद्घृष्टकं तत्पुनरेव कुड्ये,
निपीडनात्पीडितसंज्ञकं स्यात् ॥
प्रकाश में अथवा घने अन्धकार में किसी विशेष बात को देख
कर एक दूसरे के किसी अंग को दबाना या मसलना उद्घृष्ट
आलिंगन कहाता है और यदि हलका धक्का देकर फिर उसे खींचकर
आलिंगन किया जाय तो उसे पीडित आलिंगन कहते हैं ।
कामादीपिका प्रधान कला
मनसिज को जगाने वाली प्रधान कला स्पर्शिका ही है ।
जिसके आलिंगन चुम्बन दन्त-दशन, और नखक्षत आदि अनेक
भेद हैं । जिनका दिग्दर्शन आगे किया जायगा ।
आलिंगन से दो शरीरों का संघर्ष होने पर दोनों में विद्युत
प्रवाह दौड़ने लगता है । उस प्रवाह में मानसिक वृत्तियों का भी
संचार होने लगता है । उन वृत्तियों में जैसे मानसिक विचार होते