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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

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असली कोकशास्त्र ११५
बलवती स्त्री से तथा कमजोर स्त्री बलवान पुरुष से भी सरलता
पूर्वक तृप्त हो सकती है। इन्हीं कलाओं का विशेष निरूपण काम-
शास्त्र विशारद कोका पण्डित ने निम्न प्रकार किया है ।
स्पृष्टक आलिङ्गन
यद्योषितः संमुखमागताया,
अन्यापदेशाद्व्रजतो नरस्य ।
गात्रेण गात्रं घटते रतज्ञा,
आलिङ्गनं स्पृष्टकमेतदाह ॥
जब तक स्त्री पुरुष आपस में अपरिचित होते हैं और संकोच-
वश एक दूसरे से विशेष बातचीत नहीं कर पाते, उस समय घर
के किसी एकान्त स्थान में भेंट हो जाने पर एक दूसरे की देह को
किसी बहाने से स्पर्श करें, उस मुलायम स्पर्श को स्पृष्टक आलिंगन
कहते हैं ।
बिद्धक आलिङ्गन
यद्गृह्णती किश्चन वांचिताक्षं,
स्थितोपविष्टं पुरुषं स्तनाभ्याम् ।
नितम्बिनी विध्यति तां च गाढं,
गृह्णात्यसौ विद्धकमुच्यते तत् ॥
स्त्री पुरुषों के कुछ विशेष परिचित हो जाने पर दूसरों की