रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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रहना अच्छा नहीं। भोजन करने के पश्चात् कम से कम दो घण्टा
ठहर कर सम्भोग कार्य में संलग्न होना चाहिए। अन्यथा स्वास्थ्य
को हानि पहुँचती है ।
३—किसी प्रकार के परिश्रम से थके हुए स्त्री पुरुष को
कदापि सम्भोग न करना चाहिए ।
सम्भोग काल
१—वसन्त ऋतु सबसे उत्तम ऋतु है । क्योंकि इसमें
स्वभावतः स्त्री पुरुषों में काम जागृत रहता है ।
२—ग्रीष्मऋतु की रात्रि मैथुन के लिए सर्वथा हेय है।
३—वर्षाऋतु में भी स्त्री सम्बन्ध कम करना चाहिए। क्योंकि
उसमें वायु कुपित रहती है ।
४—शरद् ऋतु में यथा रुचि सम्भोग करना चाहिए।
५—जाड़े में रात को, ग्रीष्म में दिन को, वसन्त में हर समय,
और वर्षा में जब बादल उमड़ रहे हों, पानी बरसते समय सम्भोग
करना चाहिए ।
काम संदीपिनी कलाएँ
जब तक स्त्री पुरुष में काम सन्दीप्त नहीं हो जाता, तब तक
रति क्रिया का आनन्द प्राप्त नहीं हो सकता, और न तो गर्भ
स्थिति हो सकती है। इन कलाओं को जान लेने से कमजोर पुरुष