रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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होता । धीरे-धीरे कष्ट का अभाव हो ही जाता है ।
स्त्री को चाहिए कि वह पुरुष की रुचि की ओर ध्यान दे ।
ऐसे समय में उदासीन रहने से पुरुष के विचारों में भी अन्तर आ
जाता है। स्त्री को वन्ध्या समझ कर अथवा रति के अयोग्य जान
कर उसका मन विरक्त हो जाता है । प्रायः इसी का परिणाम
देखने में आता है कि गृह-पत्नि अत्यन्त सुन्दरी युवती होती हुई
भी पुरुष पर-स्त्री-गामी हो जाता है । स्त्री की यह कमजोरी उसी
की घातिका हो जाती है । फिर हजार चेष्टा करने पर भी एक
सूत्रता नहीं होती । इस लिए स्त्री को चाहिए कि सुन्दर वस्त्र
आभूषण पहन कर, सुगन्धित द्रव्यों से वस्त्रों को सुवासित कर
मनोहर हाव-भाव के साथ पति को अपनाने की चेष्टा करे । वह
इस बात को मन में निश्चय कर ले कि पति को मेरी किसी प्रकार
की कमजोरी दिखाई न दे । पति की इच्छापूर्ति में किसी प्रकार की
त्रुटि न हो । पति को किसी प्रकार की कलह का भाव दिखायी न
दे । अधिक मान या हठ न करे । पति की गति-विधि को समझने
की खूब चेष्टा करे । जो रमणी इन बातों पर विशेष ध्यान रखती
है, उसका पति उसके खिलाफ कभी नहीं होता, वह उसका दास
बन जाता है । उस घर में कभी कलह या मत-भेद नहीं होने पाता ।
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