रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११० असली कोकशास्त्र
है। यदि हाथ खींच ले तो जबरदस्ती न करनी चाहिए फिर कुछ
देर के बाद मौका देखकर अंग-स्पर्श करे । इस प्रकार बार-बार
प्रयत्न करने पर स्त्री की झेंप मिट जायगी। स्त्री स्वयं भी मिलने
का प्रयत्न करती है। किन्तु संकोचवश मिल नहीं पाती ।
यदि स्त्री बहुत ही लज्जावती हो तो उसकी किसी सखी को
मध्यस्था बनाकर बातचीत आरम्भ करे । ऐसा करने पर उसे
अवश्य सफलता मिलेगी। जब संकोचभाव दूर हो जाय तब मध्यस्था
को इशारे से हटा दे। सहसा कोई अयुक्त काम न कर बैठना चाहिए
नहीं तो पीछे बड़ा पश्चात्ताप करना पड़ता है। जैसे कहा है—
सहसा विदधीत न क्रियां अविवेकः परमापदां पदम् ।
विशेष रूप से बोलचाल हो जाने पर भी जबतक स्त्री की
सम्भोगेच्छा किसी प्रकार प्रकट न हो, तब तक उससे रति न करना
चाहिए। पुरुषकी अपेक्षा स्त्री को कामेच्छा बहुत काल के बाद
जागती है। प्रथम सम्मेलन में उन्हें बहुत ही संकोच होता है ।
इस लिये वे टालने की बहुत चेष्टा करती हैं। ऐसे समय में जो पुरुष
उनसे शीघ्र उलझने की चेष्टा करता है उस से उनका चित्त हट जाता
है। उनकी घृणा इतनी बढ़ जाती है कि वह आयु भर तक नष्ट नहीं
होती । इसीसे स्त्रियों का हृदय बहुत कोमल कहा गया है । उनको
वश में करने के लिए कुछ काल की आवश्यकता होती है । यदि
आयु, ऋतुधर्म, तन्दुरुस्ती ठीक हो, तो स्त्री प्रथम रात्रि में ही
पुरुष के वश में हो जाती है; उसका संकोच शीघ्र नष्ट हो जाता है ।