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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 110, कुल 440 में से

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असली कोकशास्त्र १०६
ध्यान रखना चाहिए कि स्त्री उसका उत्तर सिर हिलाकर देती है,
या 'हाँ' 'ना' में। उत्तर देने में स्त्री कुछ विलम्ब करती है अथवा
जल्दी। सिर हिलाकर और देर में जवाब देती है, तो समझ लेना
चाहिए कि स्त्री बहुत संकोच करनेवाली है। फिर दुबारा और भी
नम्रता के साथ प्रश्न करने चाहियें। जब वह 'हाँ' 'ना' में उत्तर
देने लग जाय, तब उससे कुछ बड़े उत्तर रखनेवाले प्रश्न करने
चाहिएँ। जब उनका जवाब ठीक आने लगे, तब उससे अपना
हाथ दिखाने को कहे। यदि हाथ न दिखाये तब कोई प्रश्न करते
हुए अपनी दृष्टि उसकी ओर से हटाकर दूसरी ओर फेर ले, और
बात करते हुए बीच-बीच में उसकी ओर देखता जाय।
पुरुष इस बात पर विशेष ध्यान देता रहे, कि स्त्री उसकी ओर
देखने का उपक्रम करती है, या नहीं। स्त्रियें प्रायः दृष्टि बचाकर
कनखियों से पति की ओर देखा करती हैं। इससे उनका अनुराग
पाया जाता है और वे पहचानने की चेष्टा भी करती हैं। उनकी
लज्जा का भाव भी देखने से घटता है। यदि पुरुष उनकी ओर से
दृष्टि नहीं हटाता, तो उनका संकोच-भाव दूर नहीं होता। यदि
उसकी दृष्टि अपनी ओर होती मालूम न पड़े तो उसकी संकोच-
मात्रा अत्यन्त अधिक समझनी चाहिए। बार-बार कहे जाने पर
हाथ न दिखाये तो स्वयं बड़ी मुलाइमीयत के साथ अपने हाथ से
उसका हाथ पकड़े और साथ ही इस बात पर भी ध्यान रक्खे कि
वह ऐसा करनेपर अपने-आपको बचाती है या चुपचाप बैठी रहती