रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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काम लेना चाहिए । क्योंकि उस समय के बर्ताव का प्रभाव
जिन्दगीभर उनके दिलों पर अमिट रूप से ऐसा अंकित हो जाता
है कि जो भुलाये भी नहीं भूलता ।
कारण यह है कि उन दोनों के पूर्व चरित्र का सच्चा भाव उस
प्रथम मिलन में ही मालूम होता है। यदि सुक्ष्म रीति से दोनों स्त्री
पुरुष एक दूसरे के बर्ताव को लक्ष्य करें, तो मनुष्य की सम्पूर्ण
जिन्दगी का परिचय उन्हें उसी समय हो सकता है । भुक्तभोगी
स्त्री-पुरुष के विचार छिप नहीं सकते । कठोरता, मृदुता, सच्चाई,
प्रेम, सरलता आदि गुण-दोषों का भेद उस छोटे से समय में बड़ी
सरल रीति से स्पष्ट हो जाता है । जिन स्त्री-पुरुषों में उस समय
किसी प्रकार का प्रकृति-विरुद्ध भेद-भाव हो जाता है, वह ताबे
जिन्दगी निकाले नहीं निकलता । इस लिए वह प्रथम रात्रि बड़े
संयम और शिष्टता के साथ निबाहनी उचित है । और ठीक उसी
रात्रि के समान अपनी सारी जिन्दगी बना लेनी चाहिए ।
प्रथम रात्रि में पति-पत्नि जब एक पलंग पर बैठे हों तब उन्हें
परस्पर एक दूसरे के प्रति मधुर आदर-सूचक शब्दों का प्रयोग
करना चाहिए । जिनमें एक दूसरे का सम्मान भलीभाँति भरा हो ।
स्त्री को पहले बोलने का साहस नहीं होता । इस लिए पुरुष को
चाहिए कि वह ऐसे छोटे-छोटे प्रश्न करे जिनका जवाब 'हाँ' या
'ना' में ही केवल हो सकता हो । स्त्री एकाएक तीन-चार अक्षर
का उत्तर नहीं दे सकती । प्रश्न करने के बाद पति को इस बात का