रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१० असली कोकशास्त्र
राजा ने कहा,—अच्छा, जैसी तुम्हारी इच्छा।
कोका पण्डित ने उस स्त्री से पूछा,—क्या आपको मोटे वस्त्र
पहनने में कोई एतराज है ? वस्त्र पहन लेने पर हम आपकी सभी
बातों का जवाब देंगे।
रमणी ने कहा,—नहीं मुझे कोई एतराज भी नहीं है। किन्तु
मेरे पास इस समय वस्त्र कहाँ है ?
उस स्त्री की बात सुनकर कोका पंडित ने अपना दुशाला उतार
कर उसे दे दिया। जब रमणी ने दुशाला ओढ़ लिया तब सब की
दृष्टि फिर उसकी ओर गयी। सब ने देखा, स्त्री की आँखें अग्नि के
समान लाल हैं। बाल छोटे, किन्तु बिखरे हुए हैं। मदन-ताप से
उसका सारा शरीर जल रहा है। नाक के छिद्र स्थूल हैं, देह मोटी
और सुडौल है। उन्मादिनी की भाँति उसके सब अंग फरफरा रहे
हैं। कुछ आभूषण अंग-प्रत्यंग में यथास्थान सुशोभित हैं ! वह
अपने हाथ में एक गुलाब का फूल लिये सूंघ रही है।
मन्त्री ने पूछा,—क्या आप इसी पुष्प के लिये पूछ रही हैं ?
इससे आपका क्या मतलब ?
रमणी ने कहा—इसी का समझने वाला कोई नहीं मिला।
मन्त्री ने कहा,—इसमें क्या रक्खा है। फूल गुलाब का है,
खिला हुआ है, खुशबूदार है और देखने में सुहावना है।
रमणी ने कहा,—कुछ और भी ?