रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ६
अपना मुँह नीचा कर लेना पड़ा । महाराज और मंत्रि-मंडल की
भी वही दशा हुई । महाराज ने अधोदृष्टि किये हुए उस रमणी से
नम्रतापूर्वक कहा,—आप इस प्रकार निरावरण की भाँति राजसभा
में क्यों आयी हैं ?
रमणी ने कहा,—क्या आप मेरे हाथ में देखते हैं कि मैं क्या
लिये हुए हूँ ?
महाराज ने कहा,—तुम्हारे हाथ में क्या है, इसका जवाब
हम तभी दे सकते हैं जब तुम किसी मोटे वस्त्र से अपने अंग ढंक
लो । इस प्रकार निर्लज्जा स्त्री को हम कोई जवाब नहीं दे सकते ।
उस स्त्री ने कहा,—मुझे यहाँ कोई लज्जा की बात दिखायी
नहीं देती । क्योंकि लज्जा पुरुषों से की जाती है, स्त्रियों से नहीं ।
महाराज ने पूछा,—क्या तुम्हें यहाँ सब स्त्रियें दिखायी देती हैं ?
उस स्त्री ने कहा,—यहाँ ही क्या, मुझे तो आजतक कहीं कोई
मर्द दिखायी ही नहीं दिया । या तो स्त्रियें और या हिजड़े ही
दिखायी दिये ।
यह बात सुनकर महाराज को बड़ा क्रोध आया । उन्होंने कड़क
कर कहा,—इस बेहूदी औरत को दर्वार से बाहर निकाल दो ।
उसी समय प्रधान मन्त्री कोकापंडित ने महाराज से नम्रता-
पूर्वक कहा,—राजन्, इस प्रकार स्त्री का तिरस्कार राजसभा से
करना अच्छा नहीं । वह ऐसा क्यों कह रही है, इसका कारण
जानना ही उत्तम होगा । यदि आप आज्ञा दें तो मैं दो-चार बातें करूँ ?