सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 108, कुल 440 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 108

असली कोकशास्त्र १०७
मर्यादा सभी का नाश करता हुआ मनुष्य सुख समझता है।
ऐसे वीर्यहीन पुरुषों को जब सन्तान उत्पन्न नहीं होती, तब
वे देवी देवता, मियाँमदार से सन्तान माँगते फिरते हैं, परमात्मा
के नियम को तोड़नेवाले के लिए, कभी सफलता नहीं मिल सकती।
इस लिए वे सन्तानहीन जिन्दगी भर भाग्य को दोष देकर रोया
करते हैं। इस लिए सुख की कामना करनेवाले स्त्री-पुरुषों को
चाहिए कि वे शास्त्र मर्यादानुसार अपने आपको सुरक्षित रखते
हुए 'नयमपूर्वक बरतें। तभी स्त्री प्रसंग का सच्चा सुख प्राप्त
कर सकते हैं।
—:o:—
सुहाग रात
यह वह रात है, जिस रात को नयी सृष्टि उत्पन्न करने के लिए
रयि और प्राण-शक्ति का पहला मिलन होता है। दोनों स्त्री पुरुष
एक दूसरे से बिलकुल अपरिचित होते हैं, एक दूसरे से संकुचित,
परस्पर मनोभाव से अनभिज्ञ, परस्पर मिलने की इच्छा रखने वाले
होते हैं। किन्तु संकोचवश कौन किसके साथ कैसा सम्भाषण
आरम्भ करे, इस बात की विवेचना ही हृदयों में अति वेग के साथ
हो रही होती है। यद्यपि उनका यह सम्बन्ध उनके जीवनभर के
लिए होता है, तथापि वे एकाकि अपने हियाव को शीघ्र तोड़ नहीं
पाते। यह ठीक भी है। उस समय उन्हें बड़ी सावधानी से ही