रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ६६
नायिका विचार
बाला स्यात् षोड़शान्दात्तदुपरि तरुणी
त्रिंशतिर्यावदूर्ध्वं,
प्रौढ़ा स्यात्पञ्च पञ्चाशदवधिपरतो
वृद्धतामेति नारी ।
दीर्घा कृष्णा च तन्वी चिरविरहवती
निम्नकच्छा श्लथास्युः,
स्थूला गौरी च खर्वा सतत रतिपरा
व्यूढ़ कच्छा घनास्युः ॥
रति शास्त्र के जानने वालों ने सोलह वर्ष तक की आयु वाली,
स्त्री को बाला ही माना है। और तीस वर्ष तक को तरुणी । तत्-
पश्चात् पचपन वर्ष तक की प्रौढ़ा, कहाती है । ये तीन अवस्था
वाली रमणियें ही सम्भोग योग्य कहाती हैं । पचपन वर्ष से बाद
वृद्धा स्त्री सम्भोग योग्य नहीं रहती ।
बाला
जब शैशवावस्था को पार कर लड़की वाल्यावस्था में पदार्पण
करती है तब उसके उन अंगों का विकास आरम्भ होता है जो उसे
पुरुष की ओर जाने से संकोच पैदा कराते हैं और साथ ही चुम्बक
की भाँति उसे पुरुष की ओर खिंचाव भी पैदा करते हैं ।—उन